पुनर्जागरण के Top 08 परिणाम

पुनर्जागरण के Top 08 परिणाम

पुनर्जागरण का काल यूरोप में मध्यकाल एवं आधुनिक काल के मध्य का संक्रमण या संक्रान्ति काल
है। इस काल के अन्तर्गत, जिसकी स्थूल अवधि चौदहवीं शताब्दी से लेकर सोलहवीं शताब्दी तक रखी जाती है, यूरोप के सांस्कृतिक जगत में परिलक्षित नवीन प्रवृत्तियों एवं उपलब्धियों को पुनर्जागरण कहा जाता है । इसनकाल में यूरोप के जीवन में कुछ आधारभूत आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन घटित हो रहे थे, जिनके कारण धर्मकेन्द्रित एवं पारंपरिक कृषि- सामंतो अर्थव्यवस्था पर आधारित यूरोप का मध्यकालीन ढाँचा चरमरा रहा था और आधुनिक यूरोप का सूर्योदय हो रहा था, जिसको प्रकाशमान करने वाले तीन प्रमुख पुनर्जागरण एवं आधुनिक युग का आरम्भ तत्त्व थे-मानववाद, तर्कबुद्धिवाद एवं वैज्ञानिक मन:स्थिति इन नवीन तत्त्वों की सबसे प्रखर अभिव्यक्ति यूरोप के साहित्य, कला एवं विज्ञान में हुई, जिसके बारे में हमने ऊपर विस्तार से चर्चा की है।

पुनर्जागरण के क्या परिणाम निकले ? पुनर्जागरण के परिणाम न केवल स्थायी एवं दूरगामी थे, बल्कि
युगपरिवर्तनकारी थे इन परिणामों का अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत किया जा सकता है–

01 मानव-केन्द्रित चेतना का उत्कर्ष

पुनर्जागरण ने मध्यकालीन धर्म-केन्द्रित चिन्तन की धुरी को बदलकर मानव-केन्द्रित बना दिया, और आधुनिक युग के विकास के साथ क्रमश: मानववादी चेतना एक परम मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित हुई। पुनर्जागरण काल में अनेक मानववादी विचारक हुए, जिनके अनुसार मानव के क्रियाकलापों एवं गतिविधियों का आधार-बिन्दु स्वयं मानव होना चाहिए। मानव किसी पूर्वनिर्धारित धार्मिक भूमिका का यांत्रिक एवं जड़ पात्र नहीं है; वह एक स्वतंत्र चिंतनशील एवं सहज अनुभूतियों से युक्त इकाई है, जिसे अपने वास्तविक एवं प्रत्यक्ष लौकिक जीवन के उत्कर्ष एवं आनन्द के लिए प्रयासरत होना चाहिए। मानव जीवन का उद्देश्य परलोक या आगामी जीवन को सुधारना नहीं है जैसा कि धर्माधिकारियों का मानना था, बल्कि अपने वास्तविक एवं तात्कालिक जीवन, परिवेश एवं संसार को अधिक जीवंत, उल्लासपूर्ण, सार्थक एवं उपयोगी बनाना है। पुनर्जागरण युग की कला एवं साहित्य में इस मानववादी चेतना की बड़ी सशक्त अभिव्यक्ति हुई है। लेकिन यह उल्लेखनीय है कि अपनी प्रारंभिक अवस्था में मानववाद की अभिव्यक्ति धार्मिक विषयों या प्रतीकों के माध्यम से की गई, उसका पूर्ण धर्मनिरपेक्षीकरण पुनर्जागरण युग के बाद में ही हो पाया, लेकिन जो कुछ बाद में हुआ, वह स्पष्टत: पुनर्जागरण युग का परिणाम था दूसरे शब्दों में,
आधुनिक काल में स्थापित मानव-केन्द्रित या मानववादी चेतना की सर्वोच्चता पुनर्जागरण युग में शुरू हुई प्रक्रिया का ही प्रतिफलन थी। माननवाद आधुनिकता का एक अनिवार्य तत्व है।

02 बुद्धिवाद या विवेकशील दृष्टिकोण का उदय

पुनर्जागरण युग को एक महत्त्वपूर्ण देन मध्ययुगीन
धार्मिक अंधश्रद्धा के स्थान पर बुद्धिवाद या विवेकशील चेतना का उदय था। अब किसी भी बात पर सिर्फ इसीलिए विश्वास नहीं किया जाता था कि वह किसी धर्मग्रन्थ में लिखी हुई है या किसी धर्मगुरु द्वारा कही गई।है । लोग अपनी बुद्धि एवं विवेक के प्रयोग से कथनों की तार्किक संगति एवं सत्य से संतुष्ट होना चाहते थे । बुद्धिवाद के उदय के आधुनिकता का मार्ग प्रशस्त कर दिया, क्योंकि बुद्धिवाद आधुनिकता का प्रमुख लक्षण है ।

03 वैज्ञानिक चेतना, उपलब्धियाँ एवं आविष्कार

आधुनिक वैज्ञानिक युग की नींव पुनर्जागरण काल में रख दी गई थी। मानववादी एवं बुद्धिवादी चेतना से वैज्ञानिक मन:स्थिति का आविर्भाव हुआ, जिसका।अर्थ है-सही प्रेक्षण एवं प्रयोग द्वारा सिद्ध होने पर ही प्राकृतिक या मानवीय जगत के किसी नियम या कार्य-।कारण सम्बन्ध को स्वीकार करना। वैज्ञानिक मनःस्थिति के उदय के बाद पुनर्जागरण युग में अनेक वैज्ञानिक।नियमों की खोज की गई, एवं अनेक यंत्रों के आविष्कार की आधारभूमि तैयार कर ली गई । आधुनिक काल में हुई अद्भुत वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्रान्ति का बीजसूत्र पुनर्जागरण युग में देखा जा सकता है।

04 व्यक्तिवाद, स्वतन्त्र चिंतन और आत्म चेतना मानववादी चेतना

, बुद्धिवाद एवं वैज्ञानिक मन:स्थिति ने व्यक्तिवादी चिंतन को पोषित किया। व्यक्ति-विशेष अपने व्यक्तितव के निर्माण एवं विकास की स्वतंत्र एवं असीम संभावनाओं से परिचित हो गया था वह एक स्वतंत्र चिंतक हो गया एवं स्वतंत्र जीवन शैली का अनुसरण करने लगा जो धार्मिक-सामाजिक एवं राजनीतिक दबावों से मुक्त थी और मूलतः उसकी।व्यक्तिवादी आकांक्षाओं से अनुप्रेरित थी। मानववाद एवं व्यक्तिवाद में अन्तर है। मानववाद का अर्थ है, मानव।के सामान्य एवं लौकिक क्रियाकलापों में अभिरुचि अर्थात् धार्मिक विषयों की तुलना में मानवीय विषयों में।रुचि। व्यक्तिवाद का अर्थ है, व्यक्ति-विशेष द्वारा स्वयं के व्यक्तित्व के विकास एवं प्रदर्शन में रुचि या व्यक्तिगत आकांक्षाओं के अनुरूप व्यवहार एवं जीवनशैली। व्यक्तिवाद से आत्मदर्प एवं आत्म- चेतना की भावना जाग्रत हुई। माइकेल एंजेलो के लिए कहा जाता है कि ‘वह इतना आत्म-चेतन और दृढ़ व्यक्तित्व का था कि सार्वजनिक सम्मान से बचता था, तथा राजकुमारों की मैत्री की अवहेलना करता था ।

05 राज्य एवं धर्म का पृथक्करण

मध्यकाल में राज्य एवं चर्च अन्योन्याश्रित थे अर्थात् एक दूसरे पर आश्रित थे। पुनर्जागरण युग में एक ओर चर्च के प्रभाव में कमी आई, दूसरी ओर बड़े राज्यों का उदय होने लगा। राज्य एवं धर्म को अब अलग-अलग आवश्यकताओं का पूरक माना जाने लगा, और उनके कार्यक्षेत्रों के मध्य एक विभाजक रेखा खींची जाने लगी। राज्य की स्वतंत्र अवधारणाओं का विकास हुआ। पुनर्जागरण पुनर्जागरण एवं आधुनिक युग का आरम्भ के प्रमुख राजनीतिक चिन्तक मैकियावेली ने अपनी कृतियों में चर्च एवं पादरियों का बहुत उपहास किया है। अपनी पुस्तक ‘हिस्ट्री ऑफ फ्लोरेंस’ में मैकियावली ने लिखा है कि पोप एवं पादरियों ने इटली की एकता में बाधा पहुँचायी एवं इटली को जानबूझकर विभाजित बनाये रखा ताकि इटलीवासी उनसे शांति का आशीर्वाद लेने उनके पास बार-बार आते रहे। स्पष्टत: मैकियावली राजनीति के पूर्ण धर्मनिरपेक्षीकरण, दूसरे शब्दों में
राज्य एवं धर्म के पृथक्करण का हिमायती था पुनर्जागरण युग में इस प्रकार के विचार अनेक बार व्यक्त किए गए एवं इस दिशा में कुछ प्रयास भी किए गए।

06 धर्मसुधार की आवश्यकता

पुनर्जागरण युग में तत्कालीन चर्च एवं उसके परंपरागत विश्वासों की अनेक दुर्बलताएँ प्रकट हो गई; चर्च का एकाधिकार एवं प्रभुत्व कम होने लगा धर्म की लोकप्रियता को बनाए रखने के लिए धर्मसुधार की आवश्यकता महसूस की गई, इस प्रकार प्रोटेस्टेण्ट धर्मसुधार आन्दोलन का जन्म हुआ। पुनर्जागरण युग में मानवतावादी विचारकों द्वारा चर्च एवं धर्माधिकारियों के प्रति दिखाई गई उपेक्षा ने धर्मसुधार आन्दोलन की पृष्ठभूमि तैयार की।

राष्ट्रीय चेतना का उदय

राष्ट्रीय चेतना या राष्ट्रवाद का उदय पुनर्जागरण युग की एक महत्त्वपूर्ण देन थी। पुनर्जागरण काल में हुई विपुल आर्थिक प्रगति एवं नवअभिजात वर्ग द्वारा समर्थित राजकुमारों द्वारा सामंतवाद का उन्मूलन-इस प्रक्रिया ने सुदृढ़ एवं केन्द्रीकृत राज्यों को जन्म दिया| पुनर्जागरण काल में क्लासिकी भाषाओं यूनानी एवं लैटिन के स्थान पर देशज या राष्ट्रीय भाषाओं, जैसे- इटालियन, फ्रेॅच, जर्मन, स्पेनिश, अंग्रेजी, पुर्तगाली, डच, नार्वेनियन, स्वीडिश आदि में विपुल साहित्य का सृजन हुआ, जिसने राष्ट्रवाद या राष्ट्रीय भावनाओं को विकसित करने में एक अहम् भूमिका निभाई।

08 मानववादी शिक्षा पद्धति का विकास

पुनर्जागरण ने मध्यकालीन शिक्षण-संस्थाओं एवं विश्वविद्यालयों में दी जाने चाली पारंपरिक विद्याओं की शिक्षा एवं उनकी पद्धतियों की अपर्याप्ता एवं दुर्बलताओं को उजागर कर दिया। शिक्षा की नयी अवधारणाओं की परिकल्पना की गई, और मानववादी विद्याओं और पद्धतियों पर आधारित शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की गई पुनर्जागरण युग में शिक्षा की नयी अवधारणाओं का प्रवर्तक विटोरिनो द फेल्ट्रे को माना जाता है, जिसने सन् 1425 में इटली में प्रथम मानववादी विद्यालय की स्थापना की जिसमें नवीन शिक्षण पद्धतियों का व्यावहारिक प्रयोग किया। इस विद्यालय ने पुनर्जागरण युग के अनेक महत्त्वपूर्ण विचारकों को जन्म दिया| बाद में नवीन पद्धति पर आधारित अनेक शिक्षण संस्थानों की स्थापना की गई; मेरबर्ग, लीडन, जेनेवा आदि स्थलों पर मानववादी शिक्षा-शास्त्र पर आधारित विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई । इस प्रकार पुनर्जागरण यूरोप के इतिहास में अनेक आधारभूत परिवर्तनों का जनक बना। यह बह काल।था, जिसने आने वाले आधुनिक युग की संभावनाओं के अनेक क्षितिजों को खोल दिया। ल्यूकस (रिनेसा एंड।दि रेफर्मेशन) के शब्दों में, ‘मानवता के इतिहास में पुनर्जागरण सबसे अधिक विचारोत्तेजक एवं सृजनशील।काल था… यह तीव्र संक्रमण एवं महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों का काल था। साहित्य, विज्ञान, कलाएँ, शिक्षा, आर्थिक एवं राजनीतिक चिन्तन एवं संस्थाएँ एवं सामाजिक जीवन, ये सभी इस काल में बड़े गहन स्तरों पर परिशोधित या रूपांतरित हो गए, एवं इन्होंने आधुनिक काल की संस्कृति के लिए एक विस्तृत आधार प्रदान किया।

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