भौगोलिक अन्वेषण करने वाले 03 देश

भौगोलिक अन्वेषण करने वाले 03 देश

नवीन सामुद्रिक मार्गों एवं नये भौगोलिक क्षेत्रों की खोज के लिए यूरोप के सभी देश आतुर एवं प्रयासरत थे, लेकिन पुर्तगाल एवं स्पेन ने इस प्रक्रिया में विशेष उत्साह एवं अग्रगामी भूमिका का निर्वाह किया। इन दोनों देशों में भी पुर्तगाल सबसे आगे था । ऐसा क्यों ? इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं
(1) पुर्तगाल में अधिकांश उद्यमी सामुद्रिक कार्य, जैसे-
मत्स्यपालन, जहाजरानी का कार्य, बन्दरगाहों की व्यवस्था आदि से जुड़े हुए थे पुत्तगाल एक पहाड़ी और अनुर्वर क्षेत्र था, और वहाँ 1348-49 में ‘ब्लेक डैथ’ नामक प्लेग जैसी महामारी के बाद बहुत से कृषक और ग्रामीण श्रमिक नगरों में जा बसे थे और सामुद्रिक गतिविधियों में लग गये थे। इस प्रकार पुर्तगाल के पास सामुद्रिक कार्यों में निष्णात एक विशेषज्ञ वर्ग, पर्याप्त संख्या में उपलब्ध था ।
(2) पुर्तगाल के पास एक लम्बी सुदंर्घ सामुद्रिक पट्टी थी एवं कुशल बन्दरगाह थे जिनका उपयोग सामुद्रिक अभियानों के लिए किया जा सकता था।
(3) पुतगाल एवं स्पेन दोनों में स्थिर, कार्यकुशल एवं सामुद्रिक अभियानों में रुचि लेने वाली सरकारें थीं, और वहाँ का व्यापारिक वर्ग सामंतों की जड़वादी मानसिकता के आधिपत्य से स्वतंत्र था, एवं साहसिक था।
(4) पुर्तगाल उत्तरी यूरोप को भूमध्यसागरीय जलवायु में पैदा होने वाली वस्तुओं की पूर्ति करने वाला प्रमुख देश होने के कारण, आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न था । पुतर्तगाल के पास नवीन खोजों के लिए, भौतिक एवं मानवीय संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता थी।
(5) इंग्लैण्ड और फ्रांस की तुलना में पुर्तगाल और स्पेन कैथोलिकों और प्रोटेस्टेंटों धार्मिक संघर्ष की विभीषिका से अपेक्षाकृत मुक्त रहे।

(01) पुर्तगालियों के सामुद्रिक अभियान एवं उनकी भौगोलिक खोजें

सबसे पहले अटलांटिक महासागर एवं अफ्रीका के पश्चिमी तटों के क्षेत्र में भौगोलिक खोजों का अभियान प्रारम्भ हुआ। 1415 में पुर्तगाल के राजा जॉन ने अफ्रीका के तट पर, अरब लोगों के अधीन सिओटा के क्षेत्र पर अधिकार कर लिया जिससे अफ्रीका के तट पर पुर्तगालियों के विस्तार का मार्ग खुल गया । पुतर्तगाल.के सामुद्रिक अभियान में सर्वाधिक रुचि लेने वाला व्यक्ति था, राजा जॉन का पुत्र, राजकुमार हेनरी (1394- 1460), जो अपनी नौसैनिक रुचि के कारण इतिहास में प्रिंस हेनरी, “दि नेवीगेटर (नाविक) ” के नाम से जाना जाता है। राजकुमार हेनरी ने पुर्तगाल में एक नाविकीय शिक्षण केन्द्र की स्थापना की, जहाँ यूरोप के अनेक नाविक, भूगोलवेत्ता एवं खगोलशास्त्री इकट्ठे होकर विचार-विमर्श किया करते थे। राजकुमार हेनरी ने पर्तगाल के सामुद्रिक अभियानों एवं नवीन क्षेत्रो की विजयों में अत्यधिक रुचि प्रदर्शित की। 1418 में पुर्तगालियों द्वारा मदीरा द्वीपों को खोज निकाला गया और उन पर अधिकार कर लिया गया 1427 में उन्होंने अजोरस को ढूंढकर उस पर अधिकार कर लिया। इसके सात वर्ष बाद, केप बोजाडोर का चक्कर लगाते हुए वे स्वर्णनदी एवं सेनेगाल नदी तक पहुँच गए। यहाँ केप बड़े द्वीपों की खोज निकाला गया। इस प्रकार पुर्तगाली सामुद्रिक अभियानों के प्रथम चरण का उद्देश्य अटलांटिक महासगार के द्वीपों और अफ्रीका के पश्चिमी तट के क्षेत्रों की खोज करना था, जिसमें वे सफल रहे । इस क्षेत्र में खोजे गए द्वीपों एवं प्रदेशों पर पुर्तगालियों ने अपने उपनिवेश बनाए, इन क्षेत्रों की दुर्गबंदियाँ कीं, एवं स्थानीय लोगों से व्यापार प्रारम्भ किया। यहीं से गुलामों के व्यापार की शुरुआत हुई। अनेक कम्पनियों की स्थापना की गई और उन्हें नये क्षेत्रों का दोहन करने, उनकी सुरक्षा व्यवस्था को सँभालने एवं भौगोलिक अन्वेषण का कार्य आगे बढ़ाने के लिए अधिकृत किया गया राजकुमार हेनरी ने भारत के बारे में सुन रखा था एवं वह भारत तक पहुँचने के समुद्री मार्ग को खोज.निकालना चाहता था लेकिन उसकी यह इच्छा उसके जीवनकाल में पूरी नहीं हो सकी।

सन् 1486 में पुर्तगाल के नाविक बार्थोलोम्यु डियाज ने एक महत्त्वपूर्ण खोज की वह अफ्रीका के पश्चिमी तट से उसके किनारे-किनारे दक्षिण की ओर चलता हुआ, उसके ठेठ, दक्षिणी छोर तक पहुँच गया जहाँ उसने ‘उत्तमाशा अंतरीप’ (केप ऑफ गुड होप) को खोज निकाला। इस खोज ने भारत तक पहुँचने के समुद्री मार्ग की खोज का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस बीच, पैड़रो डे कोविल्हम एवं अल्फोन्सो डे पेवा को मिश्र एवं हिन्द महासागर के भूक्षेत्रों में भेजा गया था जिससे कि वे हिन्द महासागर के मार्गों की जानकारी कर सकें।

वास्कोडिगामा को अपने तीन जहाजों के साथ दक्षिणी अफ्रीका के जल मार्ग से भारत के मार्ग को खोज निकालने के लिए अधिकृत किया गया। वह जून, 1497 में पुर्तगाल से रवाना हुआ एवं डियाज द्वारा खोजे गए रास्ते से अफ्रीका के दक्षिणी छोर पर अवस्थित उत्तमाशा अंतरीप तक नवम्बर में पहुँच गया। वहाँ से वह उत्तर की ओर वापिस मुड़ा, और अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी किनारे के सहारे-सहारे चलता हुआ मालिन्दी तक पहुँच गया। वहाँ उसने अरब नाविकों से हिन्द महासागर के मार्ग की जानकारी ली, और अंत में हिन्द महासागर को सीधे पार कर वह 18 मई, 1498 को भारत के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर अवस्थित नगर कालिकट पहुँच गया। भारत की खोज कर ली गई थी, जो यूरोप एवं एशिया के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुई। इससे पूर्व, अनेक शताब्दियों तक पूर्व और पश्चिम के देशों के मध्य होने वाले व्यापार पर अरबों का एकाधिकार रहा था; ‘मध्यकाल में अरबवासियों का सभ्यता एवं विज्ञान के क्षेत्र में प्रभुत्व इसी तथ्य पर आधारित रहा था।’ वास्कोडिगामा के हिन्द महासागर में पहुँचते ही अरब व्यापारियों के कान खड़े हो गए और उन्हें अपना व्यापारिक एकाधिकार संकट में दिखाई देने लगा। उन्होंने वास्कोडिगामा के अभियान को असफल करने के अनेक प्रयास किए। कालिकट में वास्कोडिगामा का अरब व्यापारियों द्वारा यह कहकर स्वागत किया गया कि “दुष्ट शैतान तुम्हारा नाश करे। तुम यहाँ क्यों आए हो ?” यह निश्चित था कि अरब लोग इस क्षेत्र में इतने समृद्ध व्यापार को आसानी से ईसाइयों के हाथ में नहीं जाने देना चाहते थे। इस हेतु अनेक नौसैनिक
युद्ध लड़े गए, एवं 1509 ई. में दीव के युद्ध में पुर्तगालियों की निर्णायक विजय हुईं।

भारतीय मसालों से लदे हुए जहाज लेकर जब वास्कोडिगामा पुर्तगाल वापिस आया तो वहाँ उसका
भव्य स्वागत किया गया। अनुमानत: उसके द्वारा ले जाये गये मसालों की कीमत उसके यात्रा-व्यय से साठ गुना अधिक थीं। पुर्तगाल ने इसके बाद समुद्री मार्ग से भारत की ओर निरन्तर जहाजी बेड़े भेजने का सिलसिला प्रारम्भ कर दिया, जो भारतीय मसाले, सूती कपड़ा, जवाहरात आदि लेकर पुर्तगाल वापिस आते थे। भारत की और जल मार्ग खुल जाने के बाद पुर्तगाल ने श्रीलंका, मलक्का, चीन एवं जापान से भी व्यापारिक सम्बन्ध.स्थापित कर लिए। पुर्तगालियों ने यूरोप में पूर्वी देशों के माल के विक्रय से अत्यधिक व्यापारिक लाभ अर्जित.किया। उन्होंने अपनी नौसैनिक क्षमता एवं ज्ञान के आधार पर यूरोप के अन्य देशों को सोलहवीं शताब्दी के.अंत तक पूर्वी देशों के साथ, प्रत्यक्ष जलमार्गीय सम्बन्ध स्थापित नहीं करने दिया।

इस प्रकार वास्कोडिगामा द्वारा भारत की खोज विश्व इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी जिसके निर्णायक परिणाम निकले। इसने यूरोप में, पूर्वी देशों की वस्तुओं के व्यापार पर पुर्तगालियों के आधिपत्य का आधार तैयार कर दिया। समुद्री मार्गों से व्यापार के सस्तेपन, एवं नौसैनिक रक्षा-व्यवस्था के कारण इसके अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होने के कारण, स्थलीय मार्गों से व्यापार लाभकारी नहीं रहा। परिणामस्वरूप इटली की व्यापारिक सर्वोच्चता को बड़ा जबर्दस्त आघात पहुँचा। इटली के नगरों में शताब्दियों तक यूरोप में पूर्वी देशों से आने वाले मसाले एवं विलासिता की अन्य वस्तुओं के व्यापार पर अपना वर्चस्व बनाए रखा था, जिसके कारण भूमध्यसागरीय क्षेत्र यूरोप का सबसे महत्त्वपूर्ण एवं समृद्धिशाली क्षेत्र बना रहा। वास्कोडिगामा द्वारा भारत की खोज से यूरोप में इटली एवं भूमध्यसागरीय क्षेत्रों का महत्त्व समाप्त हो गया। अब नेतृत्व अटलांटिक महासागर के पास स्थित देशों के पास आ गया।

1500 ईस्वी में पुर्तगाल के जहाजी कमांडर केब्राल ने अकस्मात् ब्राजील को खोज निकाला अफ्रीका के पश्चिमी तट पर अपनी यात्रा के दौरान एक भीषण तूफान के कारण केब्राल अपने रास्ते से भटककर, पश्चिमी अटलांटिक महासागर में चला गया और दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी किनारे पर स्थित ब्राजील में जा पहुँचा।

(02) स्पेनियो के सामुद्रिक अभियान और उनकी भौगोलिक खोजें

स्पैन के सामुद्रिक अन्वेषकों में सबसे महत्त्वपूर्ण है- क्रिस्टोफर कोलम्बस। स्पेन के नाविक पूर्वी देशों से सम्पर्क बनाने के लिए अपनी निजी समुद्री मार्ग खोजना चाहते थे कोलम्बस एवं स्पेन के अन्य नाविकों का विश्वास था कि अटलांटिक महासागर के पश्चिम की ओर यात्रा करते हुए एशियाई देशों के पूर्वी छोर पर पहुँचा जा सकता है। उन्हें इस वात का आभास था कि पृथ्वी गोल है, और समुद्र की पश्चिमी यात्रा के द्वारा पूरब की ओर पहुँचा जा सकता है। पुर्तगाली अफ्रीकी महाद्वीप का चक्कर लगाकर, पूरब की ओर बढ़ते हुए, हिन्द महासागर को पार कर, भारत पहुँचे थे; कोलम्बस अटलांटिक महासागर को विपरीत दिशा- यानी पश्चिम की ओर से पार कर क्रमश: भारत पहुँचना चाहता था। अपनी इस अन्विषी साहसिक प्रकृति के कारण, कोलम्बस ने “एक नई दुनिया” यानी अमेरिकी महाद्वीप की खोज कर डाली। कोलम्बस का जन्म जेनोआ में हुआ था, जहाँ का परिवेश पश्चिमी भूमध्यसागर की समुद्रखोजी परम्परा से जुड़ा हुआ था। कोलम्बस ने पुर्तगाली नाविकों की खोजों की कहानियाँ सुन रखी थी। वह स्वयं इंग्लैण्ड एवं आइसलैण्ड, मदीरा द्वीप एवं अफ्रीका के कुछ तटीय क्षेत्रों की यात्रा कर चुका था। कोलम्बस ने विशाल अटलांटिंक महासागर के अज्ञात पश्चिमी छोर के संधान का निर्णय लिया। स्पेन की रानी ईसाबेला के सहयोग से उसने तीन जहाजों का निर्माण करवाया। कोलम्बस अपने तीन जहाजों एवं नब्बे नाविकों के बेड़े के साथ स्पेन के बन्दरगाह पालोस से 3 अगस्त, 1492 को अटलांटिक सागर की पूर्वी यात्रा पर रवाना हुआ। यह जहाजी बेड़ा कई हफ्तों तक अनंत एवं अछोर दिखाई देने वाले अटलांटिक महासागर के बीच चलता रहा, दूर-दूर तक कहीं भी भूमि के दर्शन नहीं हुए। नाविकों का हौंसला टूटने लगा लेकिन कोलम्बस ने हिम्मत नहीं हारी दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए 12 अक्टूबर को उन्हें भूमि दिखाई दी-यह अमेरिकी महाद्वीप का ‘बहामा द्वीप’ था। कोलम्बस ने समझा कि वह भारत पहुँच गया है अत: उसने बहामा द्वीप के निवासियों को ‘इंडियन्स’ कहा। समुद्र में और घूमते हुए, कोलम्बस ने क्यूबा एवं हाएटी के
द्वीपों को भी खोज लिया। 15 मार्च, 1493 को कोलम्बस स्पेन वापिस आ गया।

कोलम्बस ने इसके बाद तीन और सामुद्रिक यात्राएँ कों 1492 में अमेरिकी महाद्वीप की खोज के
बाद की गई पहली यात्रा (1493-96) में उसके पास सत्रह जहाजों का बेड़ा था। इस यात्रा के दौरान उसने.प्योरिटोरिको, जमैका एवं कैरीबियन सागर के अन्य छोटे द्वीपों की खोज की दूसरी यात्रा (1498-1500 ) में.वह ओरीनोको नदी के मुहाने पर स्थित दक्षिणी अमेरिका के तट पर पहुँच गया। स्पेन के राजा फर्डिनेण्ड एवं.रानी इसाबेला के पास यह शिकायत पहुँची कि कोलम्बस इस क्षेत्र के निवासियों के साथ अत्याचारपूर्ण.दुर्व्यवहार कर रहा है। इस बात की जाँच करने के लिए एक जहाज को रवाना किया गया जो कोलम्बस को.हथकड़ियाँ डालकर स्पैन वापिस ले आया । बाद में कोलम्बस को माफ कर दिया गया अपनी तीसरी सामुद्रिक यात्रा (1502-04) के दौरान कोलम्बस हाएटी द्वीप की ओर गया, उसने मध्य अमेरिका के तट को खोजा एवं डेरियन के जलडमरूमध्य तक पहुँच गया । जमैका द्वीप में वह बीमार पड़ गया एवं स्पेन में वापिस आने के बाद 1506 में उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु से पूर्व ही स्पेन सरकार द्वारा उसके सारे सम्मानों को छीन.लिया गया था। वह स्पेन सरकार की आकांक्षाओं की पूर्ति नहीं कर सका था, पुर्तगाली नाविकों की भाँति वह
बेशकीमती सामान, जैसे-मसाले, रेशम, जवाहरात आदि अपने देश में नहीं ला पाया था ।

कोलम्बस की यात्राएँ अपने तात्कालिक प्रभाव की दृष्टि से वास्कोडिगामा की यात्राओं से कम महत्त्वपूर्ण थीं, लेकिन कोलम्बस की खोजों ने ‘उत्तरी और दक्षिणी अमरीका’ की विशाल नई दुनिया के अन्वेषण और.उपनिवेशीकरण का मार्ग प्रशस्त कर दिया था । कोलम्बस की खोजों से प्रेरणा लेकर, स्पेन का एक दूसरा नाविक वास्को नूनेज डि बल्बोआ ‘नई दुनिया’ (अमेरिका) की ओर स्वर्ण की तलाश में चल पड़ा। 1513 ईस्वी में उसने डेरियन के जलडमरूमध्य (पनामा) के जंगलों और पहाड़ों को सोना मिलने की आशा में पार कर लिया, तब उसे एक विशाल नीला.सागर दिखाई दिया जो कि प्रशान्त महासागर था। इस प्रकार प्रशान्त महासागर को बल्बोआ ने खोज निकाला (1513 ई.) ।

स्पेन के राजा चाल्ल्स प्रथम (रानी इसाबेला का पौत्र) ने पुर्तगाल के साहसी नाविक फर्डिनेन्ड मैगेलान
को, पश्चिमी समुद्रों के जलमाग्गों से पूर्वी देशों का मार्ग ढूंढ़ निकालने की उसकी योजना को, आर्थिक सहायता प्रदान की। अपने पाँच जहाजों एवं 267 साथियों के साथ मैंगेलान सितम्बर, 1519 में अटलांटिक महासागर की पश्चिमी दिशा की ओर रवाना हुआ। दक्षिणी अमेरिकी के तट का चक्कर लगाता हुआ वह उसके दक्षिणी छोर से प्रशान्त महासागर में प्रविष्ट हुआ। बड़ी कठिनाइयों के साथ वह चलता रहा। उसके कई नाविक भूख एवं बीमारी से चल बसे। अन्ततः: वह फिलिपीन द्वीप समूह में पहुँच गया ( 1521 ) । वहाँ स्थानीय निवासियों से हुए एक संघर्ष में उसे मार डाला गया । लेकिन उसका एक जहाज ‘विक्टोरिया’ वहाँ से कुछ यात्रियों के साथ रवाना हो गया और पश्चिम दिशा की ओर चलते हुए स्पेन पहुँच गया (1522)। यह विश्व के इतिहास में, सम्पूर्ण पृथ्वी का चक्कर लगाकर की गईं, पहली सामुद्रिक यात्रा थी। इससे पृथ्वी के आकार और रूप के बारे में पहली बार कुछ ठोस जानकारी प्राप्त हुई। इससे यह भी पता चल गया कि अमेरिका कोई छोटा द्वीप या देश नहीं था, बल्कि एक महाद्वीप था।

स्पेन के हर्नेन्डो कोर्टेज ने स्वर्ण की तलाश के अपने अभियान में, 1519 में मैक्सिको को खोज लिया।
वहाँ के स्थानीय निवासियों ने स्पेनवासियों के आगमन का प्रतिरोध किया, जिसके कारण जुलाई , 1520 ई. में.कोर्टेज को वापिस हटना पड़ा, लेकिन अगस्त, 1521 में, सेना की नई टुकड़ियों के साथ, उसने मेक्सिको की राजधानी पर अधिकार कर लिया। कोर्टेंज को मेक्सिको का गवर्नर नियुक्त किया गया । उसके बाद, उसने.युकटान, होण्ड्यूराज, निकारागुआ, ग्वाटेमाला एवं कैलिफोर्निया की खोज करली। मैक्सिको के दक्षिण के.इस क्षेत्र के अनुसंधान का बोड़ा उठाया। उसने 1532 ई. में इस क्षेत्र में अवस्थित पेरू को खोज निकाला, और.वहाँ के स्थानीय निवासियों (इंकाओ) को परास्त कर वहाँ अधिकार कर लिया। स्पेनवासियों ने मैक्सिको एवं.पेरू में सोने एवं चाँदी की खानों का स्थानीय निवासियों की सहायता से दोहन किया और अपने देश के लिए.विपुल धन सम्पत्ति अर्जित की अमेरिकी महाद्वीप के अनेक क्षेत्रों में स्पेनवासियों ने अपने उपनिवेश स्थापित.कर लिये।” नई दुनिया” (अमेरिका महाद्वीप) में स्पेनियों का एक बड़ा साम्राज्य स्थापित हो गया। को स्थानीय निवासी ‘स्वर्णभूमि’ कहते थे स्पेन के फ्रांसिस्को पिजारो ने.

(03) यूरोप के अन्य देशों के सामुद्रिक अभियान एवं उनकी भौगोलिक खोजें

सामुद्रिक अभियानों एवं नवीन क्षेत्रों की खोजों से मिलने वाले प्रचुर लाभ को देखते हुए यूरोप के अन्य
देश भी भौगोलिक अन्वेषण के अभियान में सम्मिलित हो गए ।

इटली का जॉन कैबोट पूर्वी देशों में पहुँचने का एक नया जलमार्ग, अटलांटिक महासागर की उत्तर- पश्चिम दिशा के अन्वेषण से ढूँढ़ना चाहता था । उसे इस कार्य के लिए इंग्लैण्ड के राजा हेनरी सप्तम ने नियुक्त किया। वह 1497 में रवाना हुआ, एवं अटलांटिक महासागर को पार कर, उत्तरी अमेरिका जा पहुँचा जहाँ उसने ‘न्यूफाउण्डलैण्ड’ की खोज की, हालांकि भ्रमवश वह यह समझ बैठा था कि वह चीन पहुँच गया है। कैबोट द्वारा कनाडा के पूर्वी तट की इस खोज ने, उत्तरी अमेरिका में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना का मार्ग- प्रशस्त किया।

इटली के साहासक नाविक अमेरिगो वेस्पुची ने 1499 ईस्वी में, कोलम्बस द्वारा खोजे गए अमेरिकी महाद्वीप के क्षेत्रों में अधिक विस्तृत अन्वेषण किए और यह तथ्य सामने रखा कि कोलम्बस द्वारा खोजा गया क्षेत्र भारत नहीं है, बल्कि एक “नई दुनिया है”, एक नया महाद्वीप है जो एशिया से भिन्न है । अमेरिगो वेस्पुची की इस खोज के आधार पर एक जर्मन भूगोलवेत्ता के सुझाव पर, नये महाद्वीप का नाम अमेरिका रख दिया गया।

फ्रांस के भी सामुद्रिक मार्गों के अन्वेषण कार्य में अपनी रुचि दिखाई। फ्रांस के राजा फ्रांसिस प्रथम ने इटली के फ्लोरेंस नगर के नाविक वेराजेनो को पश्चिमी समुद्र की ओर से एशिया के मार्ग को खोज निकालने के लिए नियुक्त किया। इस सिलसिले में वेराजेनो ने 1524 ई. में नया मार्ग ढूँढ़ने के चक्कर में उत्तरी कैरोलिना से लेकर न्यूयार्क तक की खाड़ियों के क्षेत्र का अन्वेषण कर डाला। फ्रांस के एक अन्य नाविक जैक्स कार्टिअर ने, चीन के लिए एक उत्तरी-पश्चिमी जलमार्ग ढूँढ़ने के सिलसिले में, 1535 ई. में सेंट लारेन्स नदी को खोज निकाला, और वहाँ उसने एक फ्रांसिसी चौकी की स्थापना की जो बाद में मांट्रियल नगर के रूप में प्रसिद्ध के गई। एक दूसरे फ्रेंच नाविक मार्व्वेत ने 1608 में क्यूबेक की खोज की 1609 में हालैंड के राजा द्वारा नियुक्त एक अंग्रेजी अन्वेषक हेनरी हडसन ने उस नदी की खोज की जो उसके नाम से ‘हडसन नदी’ के नाम से जानी जाती है।

भौगोलिक अन्वेषणों का यह सिलसिला चलता रहा, और अठारहवीं शताब्दीं तक, विश्व के लगभग सभी क्षेत्रों को पहचान लिया गया।

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